शब्द समर

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10.3.26

पिया नहीं आए

कवने सवतिया से नेहा लड़ाए?
मोरे पिया नहीं आए।
रात अँहरिया बीते ना बिताए,
मोरे पिया नहीं आए।

बाली रे उमर में तो आई ससुररिया,
सेजिया प एकले ना बीते रे उमरिया।
जोबन चिरइया मोर कुहू-कुहू गाए—
मोरे पिया नहीं आए।

घरवा के भार ढोवले गए रे बिदेसवा,
चिठिया न भेजे, नाहीं भेजले सनेसवा।
रोटिया ऊ जिमले कि सूतल बिना खाए—
मोरे पिया नहीं आए।

टक-टक ताकेउँ तोहर डहरिया,
छिन-छिन खोलेउँ दौड़ि किवरिया।
अँखियन काटि-काटि रतिया बिताए—
मोरे पिया नहीं आए।

बिन पिया जिनगी त लागे रे पहरिया,
सून-सून लागे मोरे दाहिने सेजरिया।
अँखिया के लोर मोर तकिया भिगाए—
मोरे पिया नहीं आए।

सूना-सूना लागे मोहे तीज-तिहरवा,
सासुर सुहाए न ही भाए पिहरवा।
फागुन के रंग हिय में बरछी गड़ाए—
मोरे पिया नहीं आए।

कइसे बिताऊँ इहाँ दिन अउ रतिया?
पियवा त रखले उहाँ मोर सवतिया।
मोर सैयाँ मोर सुरतिया भुलाए—
मोरे पिया नहीं आए।

सुनु रे सखी, मोर संघी पनिहरिया,
तोर पिया जइहैं जब उनके सहरिया।
मोर सनेस तू त दिहे रे भिजाए—
मोरे पिया नहीं आए।

कहिहे— “सुनहु मोर बलम पुरबिया,
भेजले सनेस तोहर बउरी गुलबिया।”
पति मोर पतिया के लेहू बँचाए—
मोरे पिया नहीं आए।

कइसे रे मैं अपना जोबन बचाऊँ?
निकरूँ जो घर से, तो मरि-मरि जाऊँ।
गउँआँ लोग मो पे नजर गड़ाए—
मोरे पिया नहीं आए।

पिया जो न अइहैं, हमका न पइहैं;
हमका जो पइहैं, बेसुध ही पइहैं।
बिरही बइठि के बिरह गीत गाए—
मोरे पिया नहीं आए।

30.8.25

मोर नहीं भए मोरे सँवरिया

भोर भयी घनश्याम न आए
बाट जोहत मोर बीती रे रतिया

किस सौतन संग रास रचायो
सुधि करि करि मोर बिहरे रे छतिया

मुझ बिरहन पर तरस न आई
ऐसी लुभा के गई रे सवतिया

रंग भी श्याम औ अंग भी कारो
साँवली सूरत मोहनी मुरतिया

माखनचोर ने हृदय चुरायो
मोर नहीं अब मोर सुरतिया

पीर हिया की कासूँ सुनाऊँ

मोर नहीं भए मोरे सँवरिया।

20.7.25

ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ...?

ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?
कैसे तोहें निज पीर सुनाऊँ?
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

नैहर में थी मैं प्यारी चिरैया
सासुर में मोहे बँधी हथकड़िया
कैसे तोहें अपना दर्द दिखाऊँ?
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

मायरि की मैं प्राण पियारी
बाबुल की तो रानी सुकुमारी
सासुर का कहते मैं शरमाऊँ
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

ना रुचि भोजन ना रुचि जीवन
ना रुचि बोलन ना रुचि पहिरन
दूसर रुचि मैं समय बिताऊँ
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

गुणी भले हूँ पर नहीं कोई गिनती
निज अधिकार भी पाऊँ करि विनती
भले हूँ सबल पर अबल कहाऊँ
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

सुन्दर मुख पर रहूँ कर पर्दा
शक्ति समस्त लिये फिरें मर्दा
बोलन पर निज जान गवाऊँ
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

कभी बोलें सास कभी रे ननदिया
जिठानी लड़ें जैसे लड़े रे कंजरिया
छोटका देवर को मैं कैसे समझाऊँ?
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?

गाँव समाज बना जैसे पिंजरा
नजर गड़ाए डरत मोर जियरा
कैसे के मैं निज लाज बचाऊँ?
ए री सखी तोहें का मैं बताऊँ?





19.8.22

जय श्रीकृष्ण हरे!

जय श्रीकृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे
भक्तन के दुःख सदा प्रभु जी
भक्तन के दुःख सदा प्रभु जी
बस एक पल में टरे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

तेरी शरण में जो भी आया गिरिधर
तेरी शरण में जो भी आया गिरिधर
वो भव-सिन्धु तरे
वो भव-सिन्धु तरे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

धर्मन की रक्षा की खातिर
धर्मन की रक्षा की खातिर
रूप विभिन्न धरे
रूप विभिन्न धरे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

दुष्टन से वसुधा को बचाने
दुष्टन से वसुधा को बचाने
युद्ध महा युद्ध करे
युद्ध महा युद्ध करे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

दीन-हीन मित सुख की खातिर
दीन-हीन मित सुख की खातिर
उसके भण्डार भरे
उसके भण्डार भरे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

प्रेम-बीज धरणी में धरकर
प्रेम-बीज धरणी में धरकर
जग मय प्रेम करे
जय मय प्रेम करे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

गोपियन को संग प्रेम को कान्हा
गोपियन को संग प्रेम को कान्हा
महा महा रास करे
महा महा रास करे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

तुम हो जग के कर्ता धर्ता
तुम हो जग के कर्ता धर्ता
तुम ही सब काज करे
तुम ही सब काज करे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

मैं दीनन में दीन हे केशव
मैं दीनन में दीन हे केशव
शरण तुम्हारी परे
शरण तुम्हारी परे
जय श्री कृष्ण हरे
जय जय श्री कृष्ण हरे

14.1.19

एक नया गीत

एक नया गीत गाएँगे हम आज मिलकर
क़दम अब मिलाएँगे हम आज मिलकर
नया गीत गाएँगे हम आज मिलकर

न छल न कपट न मुसीबत की चालें
न तलवार तमंचे न लाठी न भाले
मोहब्बत बहाएँगे हम आज मिलकर

जो छूटे हुए हैं उन्हें हम पुकारें
जो रूठे हुए हैं उन्हें हम दुलारें
कि बाहें फैलाएँगे हम आज मिलकर

नहीं भीख माँगें अब हम किसी से
नहीं रोते भागें अब हम किसी से
हकें छीन लाएँगे हम आज मिलकर

नहीं अब गुलामी करेंगे किसी की
नहीं रोटियों में पलेंगे किसी की
कि पंख सँवारेंगे हम आज मिलकर

न पीड़ा न आँसू नहीं दुश्मनी हो
न बाहें किसी की लहू से सनी हों
ख़ुशी में नहाएँगे हम आज मिलकर।

29.9.14

लोकगीत-रसीले नैना

चित्र साभार-गूगल 
इस गीत की प्रथम पंक्ति मैंने अपने बाल्यकाल में अपनी दीदी से सुना था| आज अचानक याद आ गया तो बाकी की पंक्तियाँ स्वतः ही लिख डाली| हो सकता है प्रमुख गीत के शब्दों से थोड़ा-बहुत इसका संबंध हो रहा हो तो इसके प्रमुख रचनाकार से क्षमाप्रार्थी हूँ|

सखी पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना
गुइयाँ पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना
रसीले दोऊ नैना, नशीले दोऊ नैना
रानियाँ पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना

मोरे नैनों का रस छलके, जब चालूँ मैं हलके-हलके
मैं कमरिया से बलखाऊँ, सम्हाले भी सम्हले ना
प्यारी पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना


पनघट पर बइठे छैला, हाथों लेके ढेला
मोरि गगरी कैसे बचाऊँ, उका काम है फोरते रहना 
बीबी पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना

कहने को मोरे जेठा, दुअरा में आके बैइठा
ओके लालच से डर जाऊँ, छुपा के मोहे रखना
बिट्टी पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना

मोर बालम बड़े छबीले, मोर बाँह कभी न ढीले
उनके बोसे में घुल जाऊँ, पनिया की सुद्ध रहे ना
लाला पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना


दिन चार बची जिंदगानी, मैं रोकूँ कइसे पानी
किस-किस से नजर बचाऊँ, बैरी ही मोरे नैना
रजनी पनिया कैइसे जाऊँ रसीले दोऊ नैना

15.4.14

कोपल देखा

खुलि गइ स्कुलिया देखा हो झमाझम भैया कोपल देखा
आई बंदरिया नाचे है छमाछम भैया कोपल देखा

कद्दू भैया चले बराती, लिए नचनिया संग
धनिया की हाल न पूछो महके गमागम भैया कोपल देखा

आलू-टमाटर छोटे भैया, पियाज को बहलावे 
गोभी की आँखें चमके हैं चमाचम भैया  कोपल देखा

भिन्डी चाची, परवर चाचा, बिना बात मुस्कुराए
लहसुन के तेवर लागे हैं तनातन भैया कोपल देखा

खीरा-ककड़ी लिए मंजीरा, छत पे आके गाएं
कटहल की ढोलक बाजे है ढमाढम भैया कोपल देखा

अदरक-हल्दी लिए किताबें घर से स्कूल को जाएँ
मिर्चा की पेन्सिल लिखती है दनादन भैया कोपल देखा

जीवन में कुछ करना है तो पहले स्कूल में आयें
सुन लो 'विद्यार्थी' की बात में है दम भैया कोपल देखा

24.2.14

मंज़िल के पुजारी

जितना गहरा हो सागर को झेलेंगे हम
जितनी ऊँची हो चोटी को पा लेंगे हम
हम जवाँ हैं जवानी की ये उम्र है
ज़िंदगानी को मस्ती से खेलेंगे हम

कौन कहता है कोई बड़ा काम है
अपनी मुट्ठी से किसका बड़ा दाम
एक क़ीमत जो हमने लगा दी कहीं
सारी दुनिया को उतने में ले लेंगे हम

एक वादा जो हमने किया जब कभी
वो इरादा न मुड़ता है पीछे कभी
लाख आएँ  त्रिलोकी के योद्धा मगर
पाँव अंगद का ज़मीं पर टिका देंगे हम

हम थिरकते है घुँघरू की झंकारों पर
होते मदहोश होठों के इशारों पर
पर अगर राह में कोई अंगार हो
पाने मंज़िल उसको भी बुझा देंगे हम|

26.1.14

ये हवा जो चली है, महक लेने दो



ये हवा जो चली है महक लेने दो,
इसकी ख़ुशबू में धीमा ज़हर ना भरो.
लाखों जीते इसकी छुअन से यहाँ,
इसमें बिजली के कंपन का डर ना भरो.

कोई महलों में है, कोई फुटपाथ में,
जी रहें हैं सभी अपनी औक़ात में.
मत बनाओ झोपड़ियों पे ताजमहल,
अपने घर से किसी को बेघर ना करो.
ये हवा..................................

सबका दीन भी है, सबका ईमान है,
सबका अपना भी कोई एक भगवान् है.
इन कटारों में ज़ंग अब लग जाने दो,
अपने जंग में किसी की कबर ना भरो.
ये हवा...........................................

एक भटके हुए की, नज़र तुम बनो,
एक अँधेरे शहर की सहर तुम बनो.
ज़िंदगी है मिली सबको जी लेने दो,
किसी की जाँ को तुम उम्र-ए-बदर ना करो.
ये हवा................................................
 

28.9.13

रोटी की क़ीमत


चलो दुनिया में हम अब रोटी की क़ीमत ढूंढ लें।
आओ भूलाने ग़म को हम अपनी नसीहत ढूंढ लें।

वो जहां गोदमों में वर्षों से राषन सड़ रहा,
उसको पाने की चलों हम सबकी नीयत ढूंढ लें। 
चलो दुनिया में हम अब रोटी की क़ीमत ढूंढ लें।

चंद टुकड़ों के लिए अब तक ग़ुलामी कर रहे,
उनकी मुक्ति की चलो अपनी तबीयत ढूंढ लें।
चलो दुनिया में हम अब रोटी की क़ीमत ढूंढ लें।

ऊंचे महलों में जहां एक काली दुनिया मस्त है,
पर्दे के पीछे की आओ सब हक़ीक़त ढूंढ लें।
चलो दुनिया में हम अब रोटी की क़ीमत ढूंढ लें।

बन के हम सैलाब निकलें इस जहां की भीड़ में,
तांडव के भूचाल सी हम अपनी हिम्मत ढूंढ लें।
चलो दुनिया में हम अब रोटी की क़ीमत ढूंढ लें।

26.6.13

चलो चलो रे चलो रे



आएं उत्तर की हवाएं, दक्षिण को ले जाएं
छाएँ पूरब में घटाएं, जाके पश्चिम में बरसाएं
सभी दिशाओं से आकर, बस एक ही गीत हम गाएं
चलो चलो रे चलो रे, चलो चलो रे चलो रे

सूरज आया निकल क्षितिज से, फिर तुम क्यों हो सोए
महाबली हो तुम बलशाली, किस्मत पर क्यों रोए
देखो अपनी भुजाएं, चाहो जैसा कर जाएं
फ़ौलादों की शाखाएं, ये चाहें सागर लंघ जाएं.
सभी दिशाओं से मिलकर, बस एक ही गीत हम गाएं
चलो चलो रे चलो रे, चलो चलो रे चलो रे

एक धरा है, एक गगन है, एक हमारी मंज़िल
एक आदम की औलादें, हौव्वा के हैं हम दिल
छोडो जाति की प्रथाएं, ये तो हैं विपदाएं
दूरी अपनी सब मिटाएं मानवता को धर्म बनाएं
सभी दिशाओं से मिलकर, बस एक ही गीत हम गाएं
चलो चलो रे चलो रे, चलो चलो रे चलो रे

तुम चाहो तो खलिहानों में भागीरथी आ जाए
तुम चाहो तो बंजर धरती सोने से लद जाए
छोडो आलस की अदाएं, समझो अपनी तुम क्षमताएं
तुमसे देश को आशाएं, चलो सागर को मथ आएं
सभी दिशाओं से मिलकर, बस एक ही गीत हम गाएं
चलो चलो रे चलो रे, चलो चलो रे चलो रे

9.7.12

मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार


मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार -
जिसमें छाई बहार, जिसमें ख़ुशी का खुमार, जिसमें सारा संसारऽऽऽऽऽऽऽ
मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार.....

स्नेहमयी माता स्तन और पिता का चुम्बन
शयनगीत अमृतमय सुनकर पुलकित होता तन-मन
वो पालना हिंडोला, वो बांहों का झूला, वो ख़ुशी की पुकारऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ
मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार.....

ममतामय कर तेल लगाते और काजल का टीका
मन में माँ के हुई वेदना जब भी लाला छींका
वो पेट का बिछौना, माँ का गीले में सोना, वो प्यारी पुचकारऽऽऽऽऽऽऽऽऽ
मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार......

दिन के खटपट से फुर्सत हो जब भी घर में आते
शिशु की छोटी सी किलकारी पर कुर्बान हो जाते
भूल जाते थकान, उठाते कंदुक सामान, पिता देते दुलारऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ
मैं ढूंढ रहा वो अपना प्यार.........