सूर्योदय
क्षितिज का पुत्र,
जो प्रति-प्रभात
पूर्व दिशा में
उसके गर्भ से जन्म लेता है,
और साँझ होते ही
पश्चिम की गोद में समा जाता है।
सूर्य प्रति-साँझ डूबता है,
ताकि वह दे सके सुखद विश्राम—
थके हुए तन को,
उलझे हुए मन को,
दौड़ते-भागते जन को।
कभी-कभी
किसी का अस्त होना भी,
दूसरों के लिए
सुख की अनुभूति दे जाता है।
कर्त्तव्य-परायणता की भाषा में,
इसे ही ‘बलिदान’ कहते हैं।
शब्द समर
विशेषाधिकार
भारतीय दंड संहिता के कॉपी राईट एक्ट (1957) के अंतर्गत सर्वाधिकार रचनाकार के पास सुरक्षित है|
चोरी पाए जाने पर दंडात्मक कारवाई की जाएगी|
अतः पाठक जन अनुरोध है कि बिना रचनाकार के अनुमति के रचना का उपयोग न करें, या करें, तो उसमें रचनाकार का नाम अवश्य दें|
10.5.26
अस्त में उदय
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