मेरे एक मित्र को मलेरिया हो गया है। बड़े ही
दुःख की बात हुई। कारण कि हम सब मस्ती करेंगे और वो आह भरेंगे और मन ही मन हम
लोगों को प्यार भरी भारतीय गाली भी देंगे। हालांकि वो गाली देने वाले तो नहीं हैं
पर ससुर मन का क्या भरोसा कभी भी कुछ भी करवा सकता है।
अच्छा मैंने चिकित्सक महोदय से पूछा कि ये
मलेरिया नामक बीमारी होती कैसे है? और किसे हो सकती है? तो
उन्होंने साफ शब्दों में बड़े प्रेम से बताया कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के
काटने से होता है और यह किसी को भी हो सकता है।
मुझे असमंजस हुआ और यह मजाक भी लगा कि एक मच्छर
वह भी महिला मच्छर के काटने से ऐसी बीमारी हो सकती है? मैं जोर से
हंसने लगा तो चिकित्सक महोदय बड़े ही आश्चर्य से मुझे देखने लगे और एक पल के लिए
उन्हें लगा कि उन्हें एक हजार रुपए और एक कंबल तो पक्का मिलने वाला है क्योंकि कहा
जाता है कि रांची पागलखाने में जो पागल को भर्ती कराता है उसे उपरोक्त एक हजार
रुपए और एक कंबल बतौर पारितोषिक दिया जाता है।
अब यह क्यों दिया जाता है यह बताने वाले को भी
नहीं पता लेकिन मैं बड़ा ही अलग टाइप का बुद्धिजीवी हूं और हर बात का मतलब अपने
तरीके से निकाल लेता हूं और इस काबीलियत की दाद-खाज-खुजली भी स्वयं ही दे लेता हूं
क्योंकि किसी और को मुझे दाद देने की फुर्सत भी नहीं होती।
तो मैंने उस रुपये और कंबल के पीछे की जो
अवधारणा निकाली वह यह थी कि इससे यह फायदा होगा कि जितने भी कड़वा सच बोलने वाले
लोग हैं और यदि पैसे से अपना मुंह बंद नहीं करते तो उन्हें पागल करार कर इसी
पागलखाने में मुबारक कर दिया जायेगा जिससे सारे काले कामों को बेधड़क अंजाम दिया
जा सके।
मैं फिर हंसते हुए बोला डाक्टर साहब एक मच्छर
आदमी को....... बना सकता है क्योंकि हो सकता कहने वाले के अनुसार वह पुरुष मच्छर
है किन्तु एक मच्छरनी में इतनी ताकत की वह किसी को बीमार कर दे?
अचानक मेरा बचपन में सुना हुआ एक गाना लवेरिया
हुआ याद आ गया। मैने चिकित्सक महोदय से पूछ लिया क्या मलेरिया और लवेरिया का कोई
आपसी संबंध है? वे हंसने लगे और बोले विद्यार्थी जी आप बेवकूफ
तो हैं ये आपकी बातों से पता चल रहा था पर इस हद तक हैं मैंने सोचा भी नहीं था। मैंने
दांत निपोर दिये क्योंकि मुझे लगा यह मेरी बड़ाई की जा रही है। ऐसा मुझे इसलिए लगा
क्योंकि बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बड़ों की गाली भी आशिर्वाद होती है अतः बड़ी ही
विनम्रता से मैंने इस गाली को अपना सम्मान मान लिया।
और फिर तड़ से उन्होंने मुझसे प्रश्न पूछ लिया,
ये
बताओ लव के बारे में जानते हो? अब मुझे फिर उन पर हंसी आई कि मुझ जैसे
प्रकाण्ड विद्वान से ये लव-कुश के बारे में पूछ रहे हैं। अरे जिसने अभिमन्यु कि
तरह सारे वेदों, सारे इतिहासों, सारे धार्मिक
किस्सों को मातृ गर्भ में ही जान लिया है वह इस पिद्दों के बारे में क्यों नहीं
जानेगा अतः मैंने उनसे कह दिया कि लव तो मर्यादा पुरुषोत्तम, रघुकुल
शिरोमणि, दशरथनन्दन भगवान श्री राम के बड़े सपूत हैं।
यहां
मैंने सीता का नाम नहीं लिया जिन्होंने इतने तिरस्कार के बावजूद भी संघर्ष करके
उसका पालन-पोषण किया नौ महीने पहले गर्भ में ढोई फिर अथाह प्रसव पीड़ा भी सहन की,
छाती
का खून भी दूध बना कर पिलाया और बाद में पुरुष सिद्धांत की रक्षा के लिए बलि का
बकरा भी बनी उसी का नाम लेने पर मेरे पौरुष को मेरा मन धिक्कारता अन्यथा यह भी तो
कहा जा सकता था कि लव त्रेता में दो पुरुषों रावण के स्त्री लोलुपता व राम के
सिद्धांतो की बलि चढ़ी एक नारी सीता का पुत्र था।
बहरहाल मैंने अपना पुरुषत्व दिखाते हुए उनसे रामपुत्र लव की बात की और
डॉक्टर साहब का एक बार जोरदार अट्टहास सुनने को मिला। वास्तव में विद्यार्थी तुम
बु्द्धू हो। उन्होंने कहा मैं उस लव की बात नहीं कर रहा भाई जो किसी का बेटा है,मैं
बात कर रहा हूं जो लड़कों को लड़कियों से हो जाता है। वह कैसे? अब
मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह प्रश्न स्वाभाविक ही था क्योंकि आज तलक कभी लड़कियों
से समीपता ही नहीं हुई थी। विद्यालय या विश्वविद्यालय में भी महिला सामिप्य नहीं
जाना।
किन्तु मेरा सवाल था मलेरिया और लवेरिया के
संबन्ध में आपने तो पूरा घूमा डाला।
दोनों में संबंध है।
वह कैसे? मेरी आंखें
आश्चर्य के कारण इतनी फट गईं कि चाहे तो कोई सराय समझकर एक रात विश्राम कर
ले। डॉक्टर साहब आप खुलासा करके बताइये
मेरे पेट में इसे जानने के लिए बड़ी ही ज़ोरों की गुदगुदी हो रही है।
देखिये मलेरिया व्यक्ति को तभी होता है जब उसे
मादा एनाफिलीज मच्छर काटती है। और लवेरिया होता है जब कोई लड़की किसी लड़के पर
नयनों से बाण चला दे।
हा हा हा हा हा हा!!!!!! हा हा हा हा हा
हा!!!!!!
हा हा हा हा हा हा!!!!!! हा हा हा हा हा
हा!!!!!!
मैंनें फिर अट्टहास प्रारंभ कर दिया और इतना
तेज़ कि डॉक्टर साहब घबरा गये। शायद उन्होंने सोचा मुझे पागलपन का दौरा पड़ गया
है।
उन्होंने पूछा, क्या हुआ?
मैने कहा तब तो मुझे मलेरिया हो ही नहीं सकता।
क्यों? उनका एक स्वाभाविक सा प्रश्न आया।
उत्तर देने की बारी मेरी थी, बड़े
ही गर्वीले स्वर में बोला, मलेरिया यदि मच्छर के काटने से होता है
वह भी महिला मच्छर के और लवेरिया लड़की को लड़के से तब भाई मुझे दोनों ही नहीं हो
सकते। क्योंकि मैं ऐसा व्यक्ति हूं जिसे काटना तो क्या छूने के भी उद्देश्य से
महिलाएं देखती तक नहीं। ये मेरा आज तक का रिकार्ड है।
मैं मलेरिया प्रूफ़ हूं। मैं मलेरिया प्रूफ़
हूं...............
यही चिल्लाते हुए मैं वहां से दौड़ पड़ा।
अभी भी मैं मलेरिया प्रूफ़ हूं जब आपके लिए यह
लेख लिख रहा हूं। मैं मलेरिया प्रूफ़ हूं क्योंकि मैं स्पष्ट सिद्धांतवादी हूं।
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