एक नया गीत गाएँगे हम आज मिलकर
क़दम अब मिलाएँगे हम आज मिलकर
नया गीत गाएँगे हम आज मिलकर
न छल न कपट न मुसीबत की चालें
न तलवार तमंचे न लाठी न भाले
मोहब्बत बहाएँगे हम आज मिलकर
जो छूटे हुए हैं उन्हें हम पुकारें
जो रूठे हुए हैं उन्हें हम दुलारें
कि बाहें फैलाएँगे हम आज मिलकर
नहीं भीख माँगें अब हम किसी से
नहीं रोते भागें अब हम किसी से
हकें छीन लाएँगे हम आज मिलकर
नहीं अब गुलामी करेंगे किसी की
नहीं रोटियों में पलेंगे किसी की
कि पंख सँवारेंगे हम आज मिलकर
न पीड़ा न आँसू नहीं दुश्मनी हो
न बाहें किसी की लहू से सनी हों
ख़ुशी में नहाएँगे हम आज मिलकर।